विचार का सृजन - The idea

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विचार का सृजन साधारणतया तीन बार होता है, आपके मस्तिष्क में, वास्तविक धरातल पर और तीसरी बार सम्बंधित लोगों की प्रतिक्रिया में.
- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'
Vichar ka srijan saadharantaya teen baar hota hai, aapke mastishk mein, vastavik dharatal par aur teesri baar sambandhit logo ki pratikriya me.
- Mithilesh 'Anbhigya'
The idea is to create a generally three times, in your brain, in response to real people on the ground and a third independent response.

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Mithilesh singh

Author, Journalist, Entrepreneur

मिथिलेश पिछले 6 साल से वेबसाइट, सोशल मीडिया के क्षेत्र में अपनी सेवायें दे रहे हैं। एक कलमकार के तौर पर लेख, कहानी, कविता इत्यादि विधाओं में निरंतर लेखन और समाज, परिवार के प्रति संवेदनशील विचार-मंथन उनकी प्रवृत्ति है। विभिन्न अख़बारों, पत्रिकाओं के संपादक-मंडल में अलग-अलग समय पर शामिल रहे हैं तो तकनीक के माध्यम को वह आज की लेखन दुनिया के लिए आवश्यक मानते हुए ब्लॉगिंग, सोशल मीडिया इत्यादि क्षेत्रों से साम्य बनाने में जुटे रहते हैं।

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