काक चेष्टा, बको ध्यानं... Struggle of youth

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बचपन में पढ़ी काक चेष्टा, बको ध्यानं... वाली संस्कृत-सूक्ति मुझे जवानी के संघर्ष में ठीक से समझ आयी.
- मिथिलेश 'अनभिज्ञ'
Bachpan me padhi kaak cheshta, bako dhyanam... wali sanskrit-sookti mujhe Jawani ke sangharsh mein thik se samajh aayee.
- Mithilesh 'Anbhigya'

In childhood, I read, kaak cheshta, bako dhyanam ... the Sanskrit-gnome I had understood the struggle of youth.

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Mithilesh singh

Author, Journalist, Entrepreneur

मिथिलेश पिछले 6 साल से वेबसाइट, सोशल मीडिया के क्षेत्र में अपनी सेवायें दे रहे हैं। एक कलमकार के तौर पर लेख, कहानी, कविता इत्यादि विधाओं में निरंतर लेखन और समाज, परिवार के प्रति संवेदनशील विचार-मंथन उनकी प्रवृत्ति है। विभिन्न अख़बारों, पत्रिकाओं के संपादक-मंडल में अलग-अलग समय पर शामिल रहे हैं तो तकनीक के माध्यम को वह आज की लेखन दुनिया के लिए आवश्यक मानते हुए ब्लॉगिंग, सोशल मीडिया इत्यादि क्षेत्रों से साम्य बनाने में जुटे रहते हैं।

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