आत्मा, परमात्मा, रिश्ते, मित्रता - Spirit, Divine, Relations, Friendship

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अगर मानवीय रिश्तों को 'आत्मा' मान लिया जाय तो मित्रता को आप परमात्मा का वह अंश मान लीजिये, जो हर आत्मा में विराजमान रहती है. परमात्मा का अंश निकलने से मनुष्य की मृत्यु हो जाती है तो मित्रता का अंश निकलने से रिश्ते की.
-मिथिलेश 'अनभिज्ञ'

If human relationships Spirit Assuming the friendships you suppose that part of the divine, which is present in every soul. The divine part of man dies leaving out part of the friendliness of the relationship.
-Mithilesh 'Anbhigya'

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Mithilesh singh

Author, Journalist, Entrepreneur

मिथिलेश पिछले 6 साल से वेबसाइट, सोशल मीडिया के क्षेत्र में अपनी सेवायें दे रहे हैं। एक कलमकार के तौर पर लेख, कहानी, कविता इत्यादि विधाओं में निरंतर लेखन और समाज, परिवार के प्रति संवेदनशील विचार-मंथन उनकी प्रवृत्ति है। विभिन्न अख़बारों, पत्रिकाओं के संपादक-मंडल में अलग-अलग समय पर शामिल रहे हैं तो तकनीक के माध्यम को वह आज की लेखन दुनिया के लिए आवश्यक मानते हुए ब्लॉगिंग, सोशल मीडिया इत्यादि क्षेत्रों से साम्य बनाने में जुटे रहते हैं।

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